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independence day images essay history in hindi

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भारत का स्‍वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में हर्ष उल्‍लास के साथ मनाया जाता है । यह प्रत्‍येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरूआत हुई थी।15 अगस्‍त 1947 वह भाग्‍यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्‍वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई। भारत द्वारा आजादी पाना उसका भाग्‍य था, क्‍योंकि स्‍वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय चला और यह एक थका देने वाला अनुभव था, जिसमें अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिए। independence day images

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Raksha Bandhan Wishes 2019

भारत देश के बारे में पुरी जानकारी independence day images

भारत विश्‍व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने-आप को बदलते समय के साथ ढ़ालती भी आई है। आज़ादी पाने के बाद भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है। भारत कृषि में आत्‍मनिर्भर बन चुका है और अब दुनिया के सबसे औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में भी इसकी गिनती की जाती है। विश्‍व का सातवां बड़ा देश होने के नाते भारत शेष एशिया से अलग दिखता है जिसकी विशेषता पर्वत और समुद्र ने तय की है और ये इसे विशिष्‍ट भौगोलिक पहचान देते हैं। उत्तर में बृहत् पर्वत श्रृंखला हिमालय से घिरा यह कर्क रेखा से आगे संकरा होता जाता है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में हिन्‍द महासागर इसकी सीमा निर्धारित करते हैं।

पूरी तरह उत्‍तरी गोलार्ध में स्थित भारत की मुख्‍यभूमि 8 डिग्री 4 मिनट और 37 डिग्री 6 मिनट उत्‍तरी अक्षांश और 68 डिग्री 7 मिनट तथा 97 डिग्री 25 मिनट पूर्वी देशान्‍तर के बीच स्थित है । उत्‍तर से दक्षिण तक इसकी अधिकतम लंबाई 3,214 कि.मी. और पूर्व से पश्चिम तक अधिकतम चौड़ाई 2,933 कि.मी. है। इसकी ज़मीनी सीमाओं की लंबाई लगभग 15,200 कि.मी. है। जबकि मुख्‍यभूमि, लक्षद्वीप और अण्‍डमान तथा निकोबार द्वीपसमूह की तटरेखा की कुल लम्‍बाई 7,516.6 कि.मी है।independence day images

स्वतंत्र दिन कि सबको शुभकामनाये 

राष्ट्र-गौरव के इस अवसर पर, मैं आप सभी देशवासियों को बधाई देता हूँ। 15 अगस्‍त का दिन, प्रत्येक भारतीय के लिए पवित्र होता है, चाहे वह देश में हो, या विदेश में। इस दिन, हम सब अपना ‘राष्ट्र-ध्वज’ अपने-अपने घरों, विद्यालयों, कार्यालयों, नगर और ग्राम पंचायतों, सरकारी और निजी भवनों पर उत्साह से फहराते हैं। हमारा ‘तिरंगा’ हमारे देश की अस्मिता का प्रतीक है। इस दिन, हम देश की संप्रभुता का उत्सव मनाते हैं, और अपने उन पूर्वजों के योगदान को कृतज्ञता से याद करते हैं, जिनके प्रयासों से हमने बहुत कुछ हासिल किया है। यह दिन, राष्ट्र-निर्माण में, उन बाकी बचे कार्यों को पूरा करने के संकल्प का भी दिन है, जिन्हें हमारे प्रतिभाशाली युवा अवश्य ही पूरा करेंगे।

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सन 1947 में, 14 और 15 अगस्त की मध्य-रात्रि के समय, हमारा देश आज़ाद हुआ था। यह आज़ादी हमारे पूर्वजों और सम्मानित स्वाधीनता सेनानियों के वर्षों के त्याग और वीरता का परिणाम थी। स्वाधीनता संग्राम में संघर्ष करने वाले सभी वीर और वीरांगनाएं, असाधारण रूप से साहसी, और दूर-द्रष्टा थे। इस संग्राम में, देश के सभी क्षेत्रों, समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोग शामिल थे। वे चाहते, तो सुविधापूर्ण जीवन जी सकते थे। लेकिन देश के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण, उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे एक ऐसा स्वाधीन और प्रभुता-सम्पन्न भारत बनाना चाहते थे, जहां समाज में बराबरी और भाई-चारा हो। हम उनके योगदान को हमेशा याद करते हैं। अभी 9 अगस्त को ही, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 76वीं वर्षगांठ पर, स्वाधीनता सेनानियों को, राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया। independence day images

हम भाग्यशाली हैं कि हमें ऐसे महान देशभक्तों की विरासत मिली है। उन्होंने हमें एक आज़ाद भारत सौंपा है। साथ ही, उन्होंने कुछ ऐसे काम भी सौंपे हैं, जिन्हें हम सब मिलकर पूरा करेंगे। देश का विकास करने, तथा ग़रीबी और असमानता से मुक्‍ति प्राप्‍त करने के, ये महत्वपूर्ण काम हम सबको करने हैं। इन कार्यों को पूरा करने की दिशा में, हमारे राष्ट्रीय जीवन का हर प्रयास, उन स्‍वाधीनता सेनानियों के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है। independence day images

यदि हम स्वाधीनता का केवल राजनैतिक अर्थ लेते हैं तो लगेगा कि 15 अगस्त, 1947 के दिन हमारा लक्ष्य पूरा हो चुका था। उस दिन राजसत्ता के खिलाफ संघर्ष में हमें सफलता प्राप्त हुई और हम स्वाधीन हो गए। लेकिन, स्वाधीनता की हमारी अवधारणा बहुत व्यापक है। इसकी कोई बंधी-बंधाई और सीमित परिभाषा नहीं है। स्वाधीनता के दायरे को बढ़ाते रहना, एक निरन्‍तर प्रयास है। 1947 में राजनैतिक आज़ादी मिलने के, इतने दशक बाद भी, प्रत्‍येक भारतीय, एक स्वाधीनता सेनानी की तरह ही देश के प्रति अपना योगदान दे सकता है। हमें स्वाधीनता को नए आयाम देने हैं, और ऐसे प्रयास करते रहना है, जिनसे हमारे देश और देशवासियों को विकास के नए-नए अवसर प्राप्त हो सकें।

हमारे किसान, उन करोड़ों देशवासियों के लिए अन्‍न पैदा करते हैं, जिनसे वे कभी आमने-सामने मिले भी नहीं होते। वे, देश के लिए खाद्य सुरक्षा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराके, हमारी आज़ादी को शक्ति प्रदान करते हैं। जब हम उनके खेतों की पैदावार और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए आधुनिक टेक्नॉलॉजी और अन्य सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।

हमारे सैनिक, सरहदों पर, बर्फीले पहाड़ों पर, चिलचिलाती धूप में, सागर और आसमान में, पूरी बहादुरी और चौकसी के साथ, देश की सुरक्षा में समर्पित रहते हैं। वे बाहरी खतरों से सुरक्षा करके हमारी स्वाधीनता सुनिश्‍चित करते हैं। जब हम उनके लिए बेहतर हथियार उपलब्ध कराते हैं, स्वदेश में ही रक्षा उपकरणों के लिए सप्लाई-चेन विकसित करते हैं, और सैनिकों को कल्‍याणकारी सुविधाएं प्रदान करते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।

हमारी पुलिस और अर्धसैनिक बल अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हैं। वे आतंकवाद का मुक़ाबला करते हैं, तथा अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था की रक्षा करते हैं। साथ ही साथ, प्राकृतिक आपदाओं के समय, वे हम सबको सहारा देते हैं। जब हम उनके काम-काज और व्‍यक्‍तिगत जीवन में सुधार लाते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।

महिलाओं की, हमारे समाज में, एक विशेष भूमिका है। कई मायनों में, महिलाओं की आज़ादी को व्यापक बनाने में ही देश की आज़ादी की सार्थकता है। यह सार्थकता, घरों में माताओं, बहनों और बेटियों के रूप में, तथा घर से बाहर अपने निर्णयों के अनुसार जीवन जीने की उनकी स्वतन्त्रता में देखी जा सकती है। उन्हें अपने ढंग से जीने का, तथा अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने का सुरक्षित वातावरण तथा अवसर मिलना ही चाहिए। वे अपनी क्षमता का उपयोग चाहे घर की प्रगति में करें, या फिर हमारे work force या उच्च शिक्षा-संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान देकर करें, उन्हें अपने विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए। एक राष्ट्र और समाज के रूप में हमें यह सुनिश्‍चित करना है कि महिलाओं को, जीवन में आगे बढ़ने के सभी अधिकार और क्षमताएं सुलभ हों। independence day images

जब हम, महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे उद्यमों या स्टार्ट-अप के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं, करोड़ों घरों में एल.पी.जी. कनेक्‍शन पहुंचाते हैं, और इस प्रकार, महिलाओं का सशक्तीकरण करते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।

हमारे नौजवान, भारत की आशाओं और आकांक्षाओं की बुनियाद हैं। हमारे स्वाधीनता संग्राम में युवाओं और वरिष्ठ-जनों, सभी की सक्रिय भागीदारी थी। लेकिन, उस संग्राम में जोश भरने का काम विशेष रूप से युवा वर्ग ने किया था। स्वाधीनता की चाहत में, भले ही उन्होंने अलग-अलग रास्ते चुने हों, लेकिन वे सभी आज़ाद भारत, बेहतर भारत, तथा समरस भारत के अपने आदर्शों और संकल्पों पर अडिग रहे।

हम अपने युवाओं का कौशल-विकास करते हैं, उन्हें टेक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग और उद्यमिता के लिए, तथा कला और शिल्प के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें संगीत का सृजन करने से लेकर मोबाइल एप्स बनाने के लिए और खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस प्रकार, जब हम अपने युवाओं की असीम प्रतिभा को उभरने का अवसर प्रदान करते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं। independence day images

मैंने राष्ट्र-निर्माण के कुछ ही उदाहरण दिए हैं। ऐसे अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। वास्तव में, वह प्रत्येक भारतीय जो अपना काम निष्ठा व लगन से करता है, जो समाज को नैतिकतापूर्ण योगदान देता है – चाहे वह डॉक्टर हो, नर्स हो, शिक्षक हो, लोक सेवक हो, फैक्ट्री वर्कर हो, व्यापारी हो, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने वाली संतान हो – ये सभी, अपने-अपने ढंग से स्वाधीनता के आदर्शों का पालन करते हैं। ये सभी नागरिक, जो अपने कर्तव्यों और दायित्‍वों का निर्वाह करते हैं, और अपना वचन निभाते हैं, वे भी स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों का पालन करते हैं। मैं कहना चाहूँगा कि हमारे जो देशवासी क़तार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, और अपने से आगे खड़े लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हैं, वे भी हमारे स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं। यह एक बहुत छोटा सा प्रयास है। आइए, कोशिश करें, इसे हम सब अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ।

प्यारे भारतवासियो 

जो कुछ भी मैंने कहा है, क्या वह अब से दस-बीस वर्ष पहले, प्रासंगिक नहीं रहा होगा? कुछ हद तक, निश्चित रूप से यह सब प्रासंगिक रहा होगा। फिर भी, आज हम अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जो अपने आप में बहुत अलग है। आज हम कई ऐसे लक्ष्यों के काफी क़रीब हैं, जिनके लिए हम वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं। सबके लिए बिजली, खुले में शौच से मुक्ति, सभी बेघरों को घर और अति-निर्धनता को दूर करने के लक्ष्य अब हमारी पहुँच में हैं। आज हम एक ऐसे निर्णायक दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में, हमें इस बात पर जोर देना है कि हम ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में न उलझें, और ना ही निरर्थक विवादों में पड़कर, अपने लक्ष्यों से हटें। independence day images

क़रीब तीन दशक बाद, हम सब आज़ादी की सौवीं वर्षगांठ मनाएंगे। पूरी दुनिया, तेजी से बदल रही है। हमें दुनिया के मुक़ाबले अधिक तेज रफ्तार से, बदलाव और विकास करना होगा। आज जो निर्णय हम ले रहे हैं, जो बुनियाद हम डाल रहे हैं, जो परियोजनाएं हम शुरू कर रहे हैं, जो सामाजिक और आर्थिक पहल हम कर रहे हैं – उन्हीं से यह तय होगा, कि हमारा देश कहाँ तक पहुंचा है। हमारे देश में बदलाव और विकास तेजी से हो रहा है, और इस की सराहना भी हो रही है। हमारे देश में, इस प्रकार के बदलाव हमारी जनता, हमारे प्रबुद्ध नागरिकों और समाज एवं सरकार की साझेदारी से संचालित होते रहे हैं। हमेशा से हमारी सोच यह रही है, कि ऐसे परिवर्तनों से समाज के वंचित वर्ग का और ग़रीबों का जीवन, बेहतर बने। independence day images

मैं आपको केवल एक उदाहरण देता हूं। इस समय ग्राम स्वराज अभियान के तहत सात प्रमुख कार्यक्रमों का लाभ हमारे सर्वाधिक ग़रीब और वंचित नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। इन सेवाओं में बिजली, बैंकिंग, कल्याणकारी और बीमा कार्यक्रमों के साथ-साथ दुर्गम इलाकों तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाना शामिल है। ग्राम स्वराज अभियान के दायरे में उन 117 आकांक्षी जिलों को भी शामिल कर लिया गया है, जो आज़ादी के सात दशक बाद भी, हमारी विकास यात्रा में पीछे रह गए हैं। independence day images

इन जिलों की आबादी में, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लोगों की संख्या अधिक है। हमारे सामने, सामाजिक और आर्थिक पिरामिड में सबसे नीचे रह गए देशवासियों के जीवन-स्तर को तेजी से सुधारने का अच्‍छा अवसर है। ग्राम स्वराज अभियान का कार्य केवल सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। यह अभियान, सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से चल रहा है। इन प्रयासों में, ऐसे नागरिक सक्रिय हैं, जो निर्बल वर्गों की कठिनाइयों को कम करने, उनकी तक़लीफ़ बांटने और समाज को कुछ देने के लिए, सदैव तैयार रहते हैं।

भारतीय परम्‍परा में, दरिद्र-नारायण की सेवा को सबसे अच्‍छा काम कहा गया है। भगवान बुद्ध ने भी कहा था कि ‘अभित्वरेत कल्याणे’ अर्थात कल्याणकारी काम, सदैव तत्‍परता से करना चाहिए। मुझे विश्वास है कि हम सभी भारतवासी, समाज और देश के कल्याण के लिए, तत्‍परता के साथ अपना योगदान देते रहेंगे।

स्वाधीनता दिवस का हमेशा ही एक विशेष महत्व होता है। लेकिन इस बार, इस दिवस के साथ एक खास बात जुड़ी हुई है। कुछ ही सप्ताह बाद, 2 अक्टूबर से, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के समारोह शुरू हो जाएंगे। गांधीजी ने, केवल हमारे स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व ही नहीं किया था, बल्‍कि वह हमारे नैतिक पथ-प्रदर्शक भी थे, और सदैव रहेंगे। भारत के राष्ट्रपति के रूप में, मुझे अफ्रीका के देशों की यात्रा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। विश्व में, हर जगह, जहां-जहां पर मैं गया, सम्‍पूर्ण मानवता के आदर्श के रूप में गांधीजी को सम्‍मान के साथ स्‍मरण किया जाता है। उन्हें मूर्तिमान भारत के रूप में देखा जाता है।

हमें गांधीजी के विचारों की गहराई को समझने का प्रयास करना होगा। उन्हें राजनीति और स्वाधीनता की सीमित परिभाषाएं, मंजूर नहीं थीं। जब गांधीजी और उनकी पत्नी कस्तूरबा, चंपारन में नील की खेती करने वाले किसानों के आंदोलन के सिलसिले में बिहार गए तो वहाँ उन्होंने काफी समय, वहाँ के लोगों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को, स्वच्छता और स्वास्थ्य की शिक्षा देने में लगाया। चंपारन में, और अन्य बहुत से स्‍थानों पर, गांधी जी ने स्वयं, स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने साफ-सफाई को, आत्म-अनुशासन और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना।

उस समय, बहुत से लोगों ने यह सवाल उठाया था कि इन सब बातों का भला स्वाधीनता संग्राम के साथ क्या लेना-देना है? महात्मा गांधी के लिए, स्वाधीनता के अभियान में, उन बातों का बहुत महत्व था। उनके लिए वह केवल राजनैतिक सत्ता प्राप्त करने का संग्राम नहीं था, बल्कि ग़रीब से ग़रीब लोगों को सशक्त बनाने, अनपढ़ लोगों को शिक्षित करने, तथा हर व्यक्ति, परिवार, समूह और गांव के लिए सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार का संघर्ष था। independence day images

गांधी जी ‘स्वदेशी’ पर बहुत ज़ोर दिया करते थे। उनके लिए यह भारतीय प्रतिभा और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम था। वे दुनिया के अन्य हिस्सों में प्रचलित चिंतन-धाराओं के बारे में सजग थे। वे यह मानते थे कि, भारतीय सभ्यता के अनुसार, हमें पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर, नए-नए विचारों के लिए, अपने मस्तिष्क की खिड़कियां खुली रखनी चाहिए। यह स्वदेशी की उनकी अपनी सोच थी। दुनिया के साथ हमारे सम्बन्धों को परिभाषित करने में – हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक आकांक्षाओं और नीतिगत विकल्पों के चयन में – स्वदेशी की यह सोच आज भी प्रासंगिक है।

गांधीजी का महानतम संदेश यही था कि हिंसा की अपेक्षा, अहिंसा की शक्ति कहीं अधिक है। प्रहार करने की अपेक्षा, संयम बरतना, कहीं अधिक सराहनीय है तथा हमारे समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। गांधीजी ने अहिंसा का यह अमोघ अस्त्र हमें प्रदान किया है। उनकी अन्य शिक्षाओं की तरह, अहिंसा का यह मंत्र भी, भारत की प्राचीन परम्‍परा में मौजूद था, और आज 21वीं सदी में भी, हमारे जीवन में यह उतना ही उपयोगी और प्रासंगिक है।

इस स्वाधीनता दिवस के अवसर पर, जो गांधीजी की 150वीं जयंती समारोहों के, इतना करीब है, हम सब भारतवासी अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में, उनके द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने का संकल्प लें। हमारी स्वाधीनता का उत्सव मनाने, तथा भारतीयता के गौरव को महसूस करने का, इससे बेहतर कोई और तरीका नहीं हो सकता।

यह भारतीयता केवल हमारे लिए नहीं है। यह पूरे विश्व को भारतीय सभ्‍यता की देन है। गांधीजी और भारत की सोच ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की रही है, हम पूरी दुनिया को एक ही परिवार मानते हैं। इसीलिए हमारा ध्यान सदैव विश्व-कल्याण पर होता है, चाहे वह अफ्रीकी देशों की सहायता करना हो, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर पहल करनी हो, संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के लिए दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में सेना भेजनी हो, पड़ोसी देशों में प्राकृतिक आपदा के समय मदद पहुंचानी हो, या फिर विश्व में कहीं भी, विषम परिस्थितियों में फंसे भारतवासियों को वहाँ से सुरक्षित निकालने के साथ-साथ, दूसरे देशों के नागरिकों को भी वहाँ से बाहर निकालना हो। गांधीजी और भारत की इसी सोच के अनुसार, हम स्वास्थ्य एवं मानव-कल्याण के लिए योगाभ्यास को, तथा विकास के लिए आधुनिक टेक्नॉलॉजी को, पूरी दुनिया के साथ साझा करते हैं। हम सब गांधीजी की संतान हैं। जब हम एकाकी पथ पर चलते हैं, तब भी हमारी आँखों में पूरी मानवता के कल्याण के सपने होते हैं।

अनेक विश्वविद्यालयों में अपने संवादों के दौरान, मैंने विद्यार्थियों से यह आग्रह किया है कि वे साल में चार या पांच दिन किसी गांव में बिताएं। U.S.R. यानि ‘यूनिवर्सिटीज़ सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी’ के रूप में किए जाने वाले इस प्रयास से विद्यार्थियों में, अपने देश की वास्तविकताओं के बारे में, जानकारी बढ़ेगी। उन्हें, सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों से जुड़ने और उनमें भाग लेने का अवसर मिलेगा, तथा वे ऐसे कार्यक्रमों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इस पहल से विद्यार्थियों को भी लाभ होगा और साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी मदद मिलेगी। इससे, हमारी आज़ादी के संघर्ष जैसा जोश फिर से पैदा होगा और हर नागरिक को राष्ट्र-निर्माण से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

अपने देश के युवाओं में आदर्शवाद और उत्साह देखकर मुझे बहुत संतोष का अनुभव होता है। उनमें अपने लिए, अपने परिवार के लिए, समाज के लिए और अपने देश के लिए कुछ-न-कुछ हासिल करने की भावना दिखाई देती है। नैतिक शिक्षा का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त कर लेना ही नहीं है, बल्कि सभी के जीवन को बेहतर बनाने की भावना को जगाना भी है। ऐसी भावना से ही, संवेदनशीलता और बंधुता को बढ़ावा मिलता है। यही भारतीयता है। यही भारत है। यह भारत देश ‘हम सब भारत के लोगों’ का है, न कि केवल सरकार का।

एकजुट होकर, हम ‘भारत के लोग’ अपने देश के हर नागरिक की मदद कर सकते हैं। एकजुट होकर, हम अपने वनों और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण कर सकते हैं, हम अपने ग्रामीण और शहरी पर्यावास को नया जीवन दे सकते हैं। हम सब ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर कर सकते हैं। हम सब मिलकर, ये सभी काम कर सकते हैं, और हमें यह करना ही है। यद्यपि इसमें सरकार की प्रमुख भूमिका होती है, परंतु एकमात्र भूमिका नहीं। आइए, हम अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों और परियोजनाओं का पूरा-पूरा उपयोग करें। आइए, देश के काम को अपना काम समझें, यही सोच हमें प्रेरणा देगी। independence day images

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं एक बार फिर आपको, और आपके परिवार के सदस्यों को, स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई, और आप सबके स्वर्णिम भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूं।

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